मेरा जीवन
मेरा जीवन स्वर्ग की मुझे अब चाह नहीं, नर्क की ओर मेरी राह नहीं, जीवन जीने का सपना था, ना कोई जगत में अपना था, अपने दम पर मैं बढ़ आया, ना साथ किसी का था साया, मैं डरा नहीं और झुका नहीं, मैं रुका नहीं और थका नहीं, जीवन थमने का नाम नहीं, और मौत कोई विश्राम नहीं, जब तक हैं जीवन जीता जा, दो घुट सबर के पीता जा, सर उठाकर चलकर देख, अकड़ को तू भूलकर देख, स्वर्ग यही हैं नरक यही हैं, तू क्यों इनसे डरता हैं, माता-पिता की सेवा से बढ़कर, जीवन में और चाह नहीं ।। Read More…